chalte chalte

Zindagi ke safar mein

43 Posts

155 comments

drmalayjha


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

Posted On: 1 Apr, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

कभी कभी

Posted On: 13 Mar, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

Posted On: 7 Mar, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

जरा सोचो तो…..

Posted On: 29 Feb, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

10 Comments

दर्द का सच

Posted On: 29 Feb, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

मेट्रो लाइफ में

11 Comments

Page 1 of 512345»

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: sonam sonam

महोदय बतों ही बातों में सहज ढंग से दिल का छूती हुयी एवं वास्तविक प्रेम का संदेश देती हुयी आपकी रचना को नमन व बधाई। काश! हम प्रेम की कालजयी भावना को समझ सकते तो आज समाज की तस्वीर कुछ और ही होती। इसको मैने भी निम्नलिखित ढंग से शब्द देने का तुच्छ प्रयास किया था। अभी कल ही इसी मंच पर वैलेन्टाइनडे पर एक लेख पढा,पढकर मुझे भी कुछ लिखने की इच्छा हुई क्योंकि लेख में इतने सुन्दर ढंग से प्रेम का विश्लेषण किया गया है कि पढने के बाद से अब तक मेरे दिमाग में सिर्फ यही गूँज रहा है कि लोगों को वैलेन्टाइनडे मनाने की आवश्यकता ही क्यों महसूस होती है,प्रेम तो शाश्वत होता है,प्रेम शब्दरहित होता है,प्रेम तो प्रकृति के कण-कण में समाहित है,प्रेम तो उपहार के रूप में हमें प्रकृति से स्वयं ही मिला हुआ है तो फिर इसके इजहार की आवश्यकता शायद तभी पडेगी जब प्रेम (किसी भी रूप में,किसी भी मात्रा में) कलुषित होगा।प्रेम वह मूलभवना है जो स्वयं प्रकाशित है,स्वयं दर्ष्टव्य है और सतत प्रवाहशील वह अविरल धारा है जो क्षण प्रतिक्षण प्रकति के सामीप्य से महसूस की जा सकती है। इस भवना से पशु पक्षी भी ओतप्रोत हैं(किन्तु सर्वाधिक विकसित प्राणी की संज्ञा के बावजूद भी मानव को ओतप्रोत होने में अभी समय लगेगा? ) और शायद इसीलिए प्रेम की भाषा वह भी समझते हैं।कल-कल करती नदियों से,पक्षियों की चहचहाट से,हवा की सरसराहट से,सबको आश्रय देती वसुधा से, सूर्य की रोशनी से,चाँद की शीतलता सहित प्रकति के हर रूप से प्रेम के भावनामय संदेश को हर पल हर दिन महसूस किया जा सकता है।इसीलिए एैसी सर्वव्याप्त मूलभावना को न तो समय के किसी बन्धन में बाँधने की आवश्यकता है और न ही कोई औचित्य और न ही यह किसी विशेष दिन का मोहताज है। जरूरुत है सिर्फ एैसे कार्य करने की जिनसे शुभतारूपी प्रेम के सर्वत्र प्रसार में कोई अवरोध न उत्पन्न हो। अत: हमें वैलेन्टाइनडे नहीं बलिक वैलेन्टाइनमोमेन्ट हर पल मनाना चाहिए कदाचित तभी हम अपने लोक और परलोक दोनो सुधार सकेगें। साथियों मेरे पास आज आए एक एस0एम0एस0 के अनुसार आज 'प्रामिसडे'है, इसको पढते ही मेरे मन में विचार आया कि क्यों न अपने आप से एक वादा करें कि कुछ भी हो अगर हर वक्त नही तो कम से कम यथासम्भव अधिकतम सीमातक सत्य ओर प्रेम की राह में लाख दुश्वारियाँ होने के बावजूद चलने का प्रयत्न तो करें। मेरा मानना है कि अगर हम अपने वादे पर खरे उतरे तो वह दिन दूर नहीं होगा जब रामराज्य की कल्पना साकार होती हुई महसूस होने लगेगी और तभी शायद 'हैपी प्रामिजडे' की सार्थकता सही अर्थो में सिद्ध होगी। अत: आप सभी सुधीजनों को भी 'हैपी प्रामिजडे'।

के द्वारा: jagobhaijago jagobhaijago

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: minujha minujha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: drmalayjha drmalayjha

के द्वारा: Piyush Kumar Pant Piyush Kumar Pant




latest from jagran