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चलो थोड़ा रूमानी हो जाएँ

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चलो थोड़ा रूमानी हो जाएँ
कुछ हक़ीकत में जियें
कुछ ख़्वाब में मर जाएँ.
एक चेहरा तराश लें
एक गुलशन तलाश लें
एक हाथ में उसका हाथ हो
एक हाथ में मय का गिलास लें.
उसकी खुली जुल्फों की छांव हो
उसकी आँखों में सपनों का गाँव हो
कंपकपाते होठों पर
थरथराते कुछ लफ्ज़ हों
दिल में गुनगुनाते बज़्म हों
आहिस्ता-आहिस्ता चढ़ता सुरूर हो
दिल में मुहब्बत का गुरुर हो
क्षितिज से उठता तूफ़ान
स्याह होता आसमान
लहरें किनारों की मर्यादा तोड़ते हुए
साहिल से टकराते हुए
बिखरने को बेताब हों
उफ! फिर न जाने क्या हो
चलो अब जाग जाएँ
हक़ीकत की दुनियां में भाग आयें
हक़ीकत कठोर सही
फिर भी हकीकत है
ख़्वाब हसीन सही
फिर भी बस ख़्वाब है
ज़िन्दगी है तो जीना है
हक़ीकत ने जो ज़ख्म दिए
ख्वाबों के रेशमी धागों से सीना है.

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadhana thakur के द्वारा
February 12, 2012

बहुत अच्छी कविता भाई …….

    drmalayjha के द्वारा
    February 14, 2012

    Thank You Sadhana

vikaskumar के द्वारा
February 11, 2012

आपने एक अच्छी कविता लिखी है । आपकी कविता से ख्वाब और हकीकत दोनों की जरूरत का पता चलता है ।

div81 के द्वारा
February 11, 2012

मलय जी, बहुत ही खुबसुरत लगी आप की ये रूमानी कविता बधाई

    drmalayjha के द्वारा
    February 14, 2012

    मैं आपको क्या कह कर संबोधित करूं समझ नहीं पा रहा. आपने मेरी रचना को सराहा इसके लिए आपका शुक्रिया दिव८१.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 10, 2012

अच्छी कविता.बधाई! मलय जी.

    drmalayjha के द्वारा
    February 14, 2012

    राजीव जी आपका शुक्रिया.


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