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वेलेंटाइन डे

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आज वेलेंटाइन डे है
दिल ने कहा कि
हम भी इसे मनाएं.
मैंने अपनी पत्नी को
अपना रूमानी ख्याल बताया.
श्रीमतीजी ने नाक-भौं सिकोड़ा
कहा-शादी के बाद ये नहीं करते.
मैंने पुछा-क्यों, शादी होने के बाद
क्या भावनाएं ख़त्म हो जाती हैं?
क्या शादीशुदा व्यक्ति
किसी की सुन्दरता की तारीफ़,
किसी की नजाकत की तारीफ़.
करने की पात्रता खो देता है?
तबतो हर शादीशुदा व्यक्ति को
ताजमहल देखने से वंचित करना चाहिए.
श्रीमतीजी ने आँखें तरेर कर कहा-
भाषण मत दो,
वेलेंटाइन डे कुंवारे लोगों का
विदेसी पर्व है,
तुम्हारे लिए नहीं है.
मैंने कहा-
नहीं,ये प्रेम का दिन है,
प्रेम के उद्गार का दिन है,
प्रेम इज़हार का दिन है
प्रेम तो कोई भी कर सकता है
किसी से भी कर सकता है,
तो, मैं भी कर सकता हूँ.
ऐजी, सुनती हो-
आई लव यू.
पत्नी ने घूर कर देखा
और कहा- क्या कहा?
मैंने कहा-आई लव यू!
उसने कहा-शर्म करो,
तुम्हे क्या हो गया है,
आज बहकी बहकी बातें कर रहे हो
सुबह से ही माथा ख़राब कर रहे हो,
कोई काम नहीं है तो,
जाओ जाकर कपडे धोओ.
मेरा रोमांस कपड़ों के साथ
धुलने वाला था,
प्रेम के इस पर्व का जोश
बस मन में ही
घुलने वाला था.
मैं सोच रहा था,
सचमुच गंभीरता से सोच रहा था
कि
क्या शादी के बाद
आई लव यू
का अर्थ खो जाता है
क्या लव ही खो जाता है?
तभी श्रीमतीजी चाय ले आई
बोली-पहले चाय पीलो
फिर कपड़े धोना
आज मैं तुम्हारा मनपसंद
खाना बना रही हूँ,
खाना खाकर बच्चों के साथ
मार्केट चलेंगे.
तुम्हारे जन्मदिन के लिए
कुछ खरीददारी करेंगे.
मैं चाय पीता रहा,
साथ ही साथ सोचता रहा-
यही प्रेम है
बिना आई लव यू बोले
मेरी पत्नी ने
वेलेंटाइन डे का अर्थ समझा दिया
शादी होने के बाद
लव कम नहीं होता
लव का अर्थ नहीं बदलता
लव तो फैल जाता है
हर काम में
हर संबोधन में
लव समा जाता है
जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव में
सुख में, दुःख में,
आंसू में, मुस्कान में.
यही तो प्रेम है
जो किसी एक दिन का
पर्व नहीं
ये ही तो प्रेम है
जो लाल गुलाब का मोहताज़ नहीं
ये प्रेम तो
मां का आशीर्वाद है,
बहन का स्नेह है,
पत्नी का साथ है,
बिटिया का स्पर्श है
और
बेटे की ज़िद है.
ये तो ज़िन्दगी भर के लिए है
यही तो ज़िन्दगी है.
मैंने ज़िन्दगी को विश किया-
आई लव यू.

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अलीन के द्वारा
February 16, 2012

सादर नमस्कार! सार्थक और सुन्दर रचना ….बधाई कृपया मेरी सच्ची प्रेम कहानी पर अपना बेशकीमती सुझाव और प्रतिक्रिया अवश्य दे… मेरी सदा-एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी

sadhana thakur के द्वारा
February 16, 2012

वास्तविक हकीकत भाई ,बहुत ही अच्छी कविता ,जरा सुर्ख लाल भी पढना .बधाई हो ……

yogi sarswat के द्वारा
February 15, 2012

झा जी , नमस्कार सराहनीय , सार्थक एवं व्यवहारिक रचना ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/14/

    drmalayjha के द्वारा
    February 15, 2012

    योगी सारस्वत जी, नमस्कार. आपको कविता अच्छी लगी, बहुत बहुत धन्यवाद.

shashibhushan1959 के द्वारा
February 15, 2012

आदरणीय झा जी, सादर ! व्यावहारिक, सार्थक और जिम्मेदार प्रेम का अद्भुत चित्रण ! बधाई !

    drmalayjha के द्वारा
    February 15, 2012

    शशिभूषण जी, नमस्कार. आपको रचना अच्छी लगी, शुक्रिया.

abhishektripathi के द्वारा
February 14, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

abodhbaalak के द्वारा
February 14, 2012

सर आपने प्रेम की वास्तविकता को जिस सरल ढंग से ………….. प्रेम केवल वैलेंटाइन डे के दिन ही नहीं बल्कि जीवन की हर ………………. धन्यवाद \आपका इस रचना के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    drmalayjha के द्वारा
    February 15, 2012

    अबोधबालक जी नमस्कार, आपको कविता पसंद आई, शुक्रिया.

jagobhaijago के द्वारा
February 14, 2012

महोदय बतों ही बातों में सहज ढंग से दिल का छूती हुयी एवं वास्तविक प्रेम का संदेश देती हुयी आपकी रचना को नमन व बधाई। काश! हम प्रेम की कालजयी भावना को समझ सकते तो आज समाज की तस्वीर कुछ और ही होती। इसको मैने भी निम्नलिखित ढंग से शब्द देने का तुच्छ प्रयास किया था। अभी कल ही इसी मंच पर वैलेन्टाइनडे पर एक लेख पढा,पढकर मुझे भी कुछ लिखने की इच्छा हुई क्योंकि लेख में इतने सुन्दर ढंग से प्रेम का विश्लेषण किया गया है कि पढने के बाद से अब तक मेरे दिमाग में सिर्फ यही गूँज रहा है कि लोगों को वैलेन्टाइनडे मनाने की आवश्यकता ही क्यों महसूस होती है,प्रेम तो शाश्वत होता है,प्रेम शब्दरहित होता है,प्रेम तो प्रकृति के कण-कण में समाहित है,प्रेम तो उपहार के रूप में हमें प्रकृति से स्वयं ही मिला हुआ है तो फिर इसके इजहार की आवश्यकता शायद तभी पडेगी जब प्रेम (किसी भी रूप में,किसी भी मात्रा में) कलुषित होगा।प्रेम वह मूलभवना है जो स्वयं प्रकाशित है,स्वयं दर्ष्टव्य है और सतत प्रवाहशील वह अविरल धारा है जो क्षण प्रतिक्षण प्रकति के सामीप्य से महसूस की जा सकती है। इस भवना से पशु पक्षी भी ओतप्रोत हैं(किन्तु सर्वाधिक विकसित प्राणी की संज्ञा के बावजूद भी मानव को ओतप्रोत होने में अभी समय लगेगा? ) और शायद इसीलिए प्रेम की भाषा वह भी समझते हैं।कल-कल करती नदियों से,पक्षियों की चहचहाट से,हवा की सरसराहट से,सबको आश्रय देती वसुधा से, सूर्य की रोशनी से,चाँद की शीतलता सहित प्रकति के हर रूप से प्रेम के भावनामय संदेश को हर पल हर दिन महसूस किया जा सकता है।इसीलिए एैसी सर्वव्याप्त मूलभावना को न तो समय के किसी बन्धन में बाँधने की आवश्यकता है और न ही कोई औचित्य और न ही यह किसी विशेष दिन का मोहताज है। जरूरुत है सिर्फ एैसे कार्य करने की जिनसे शुभतारूपी प्रेम के सर्वत्र प्रसार में कोई अवरोध न उत्पन्न हो। अत: हमें वैलेन्टाइनडे नहीं बलिक वैलेन्टाइनमोमेन्ट हर पल मनाना चाहिए कदाचित तभी हम अपने लोक और परलोक दोनो सुधार सकेगें। साथियों मेरे पास आज आए एक एस0एम0एस0 के अनुसार आज ‘प्रामिसडे’है, इसको पढते ही मेरे मन में विचार आया कि क्यों न अपने आप से एक वादा करें कि कुछ भी हो अगर हर वक्त नही तो कम से कम यथासम्भव अधिकतम सीमातक सत्य ओर प्रेम की राह में लाख दुश्वारियाँ होने के बावजूद चलने का प्रयत्न तो करें। मेरा मानना है कि अगर हम अपने वादे पर खरे उतरे तो वह दिन दूर नहीं होगा जब रामराज्य की कल्पना साकार होती हुई महसूस होने लगेगी और तभी शायद ‘हैपी प्रामिजडे’ की सार्थकता सही अर्थो में सिद्ध होगी। अत: आप सभी सुधीजनों को भी ‘हैपी प्रामिजडे’।

    drmalayjha के द्वारा
    February 15, 2012

    श्रीमान, प्रेम तो महज़ एक अहसास है जिसे खामोश रहकर ही बयां कर सकते हैं, आवाज़ लगाकर नहीं. आपका आभार.

dineshaastik के द्वारा
February 14, 2012

इसी विस्तृत प्रेम को प्रेम कहते हैं दोस्त, प्रेम को बहुत  ही सुन्दर परिभाषा दी आपने, बधाई……..

    drmalayjha के द्वारा
    February 15, 2012

    दिनेश जी, आपको रचना पसंद आई, शुक्रिया आपका.


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