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मेरे हिस्से का पाप

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होली का त्यौहार, रंग और मस्ती की खुमार-ऐसे में अगर कोई गुस्ताख़ी हो जाये तो उसे कहते हैं-”बुरा ना मानो होली है”. एक आम आदमी ऐसी ही गलती करने जा रहा है, या तो वो सही है या गलत. अगर सही है तो क्यों, अगर गलत है तो बुरा ना मानो होली है.
……………………………………………………………………………………………………………………….
मैं पापी हूँ
मैंने पाप किया है
मैंने किसी से छल किया
किसी से की बेवफाई
किसी का दिल तोड़ा,
किसी को धोखा दिया.
बहुतों से मेरे सम्बन्ध रहे
कुछ मुझसे बड़ी, कुछ छोटी
और कुछ हमउम्र रहे.
हाँ! मैंने ये सब पाप किये हैं
मैं पापी हूँ मगर पूजो मुझे
पूजो मुझे, क्योंकि मैं……..
मैं
मैं तुम्हारा कृष्ण हूँ,राम हूँ.
कहाँ गए व्यास, तुलसी
कोई बुलाये उन्हें
कहो महाग्रंथ रचने मेरे चरित का
गाकर तो सुनाये कोई सूर
छंद मेरी रास-लीलाओं का.
मैंने ही छला था बलि को
सीता का दिल मैंने ही तोड़ा था
मैं ही वो रसिक कृष्ण हूँ
जिसने एक साथ
कई बालाओं से नाता जोड़ा था.
त्रेता, द्वापर में तुमने पूजा मुझे
अवतार मानकर
मैं तो आज भी वही हूँ
मेरे हर कलाप वही पुराने हैं
वही देह आज भी है
जिसे तुमने कभी अवतार कहा था.
फिर देख रहे हो क्यों
आज इतनी हिकारत से?
मेरे आज के कलापों को भी
लीला समझो
पूजो मुझे अवतार मानकर.
क्या हुआ अगर मैं
आज कंस को नहीं मार सकता
एक कंस के नहीं मरने से
तुम्हारी भक्ति,
तुम्हारा मुझमे अटल विश्वास
बदल तो नहीं जायेगा.
और एक कंस के मरने से
अन्याय का साम्राज्य तो
नष्ट नहीं हो पायेगा.
दरअसल, तुम्हारा यही विश्वास
मुझे काहिल बना गया.
तुमने मुझे पूजा था,
अब भी पूजो
क्योंकि मैं तुम्हारा भगवान् था
अब भी हूँ.
मैं अर्जुन का वही सखा-सारथी हूँ
जिसने उसे सिखाया था जीना
अपनों को मारकर
ये नीति थी,शिक्षा थी,धर्म था.
मैं आज के मानवों को
अर्जुन से ज्यादा कुशाग्र मानता हूँ
जो सुख से जीने के लिए
कभी अपनों को मारने से नहीं हिचकता.
आज किसी अर्जुन को
मेरी जरूरत नहीं
मगर मैं तो सदा साथ रहूँगा
मैं ही वो युगपुरुष हूँ
जिसके क़दमों में तुम्हारा तीर्थस्थल है.
शब्दों के अर्थ
तुम्हारे लिए बदलते होंगे
मेरे लिए तो
हर शब्द अर्थहीन हैं
क्योंकि
मैं खुद अर्थ हूँ हर शब्द का.
मैं तुम्हारा भगवान् हूँ
तुम्हारा कृष्ण,तुम्हारा राम हूँ.
आज कंस, रावण एक नहीं हैं तो क्या
मैंने फिर अवतार लिया है
क्षीर सागर में मैं ऊब गया
अब मुझे इस संसार में घूमने दो
एक लक्ष्मी से मेरा मन भर गया
मुझे अनेक बालाओं में रमने दो
इसे पाप नहीं, मेरी लीला समझो
मुझे पूजो
मुझे अपना भगवान् समझो
कृष्ण समझो,राम समझो.
…………………………………………………………………………………………………………………….
…………………………………………………………………………………………………………………….
ये महज़ एक कविता है, कृपया कोई इसे अपनी धार्मिक भावनाओं से ना जोड़ें.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
April 6, 2012

अगर  सचमुच  ईश्वर पर व्यंग  है तो बेहद ही खूबसूरत  रचना।

chandanrai के द्वारा
March 10, 2012

मुझे पूजो मुझे अपना भगवान् समझो कृष्ण समझो,राम समझो. सादर नमस्कार! लाजवाब भाव के साथ लाजवाब अभिव्यक्ति……..हार्दिक आभार!.

minujha के द्वारा
March 8, 2012

आपको होली की ढेर सारी शुभकामनाएं

    March 8, 2012

    सादर नमस्कार! आप इसे एक कविता कह सकते है, मैं नहीं क्योंकि आपने जो कुछ लिखा है एक हकीकत हैं जिसे हम लोग समझकर या तो अनदेखा कर देते है या फिर समझना नहीं चाहते है. यदि आप को लगता हैं कि आप सही है तो उसे सहर्ष स्वीकार कीजिये और अपनी बात को मजबूती के साथ रखिये या फिर आपको प्रतिक्रियाओं से दर लगता है तो फिर सच को स्वीकार मत कीजिये. आप भी झूठ के साथ जीना सीखिए. वैसे लाजवाब भाव के साथ लाजवाब अभिव्यक्ति……..हार्दिक आभार!.. आपको और आपके सभी अपनों को होली की ढेर सारी शुभकामनायें


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